क्या आदम अलैहिस्सलाम को दुनिया में सज़ा के तौर पर भेजा गया ?

सवाल: कुछ वक्त पहले, मैंने एक नॉन मुस्लिम ग्रुप में ये सवाल कुछ यूं देखा था कि "अल्लाह ने तो आदम को पैदा ही दुनिया में भेजने के लिए किया था, तो ये शैतान के बहकाने के बाद दुनिया में भेजने का क्या तुक है ? अल्लाह ने तो पहले ही आदम को दुनिया में भेजना था फिर शैतान पर इंसान को दुनिया में भिजवाने का इल्ज़ाम क्यों ?"
.
.... कल हमारे एक अज़ीज़ भाई ने भी इसी से मिलता जुलता सवाल किया,
"अस्सलामो अलैकुम ज़िया भाई, .... क़ुरआन पाक में है कि शैतान के बहकाने पर जब आदम अलैहिस्सलाम ने अल्लाह की नाफरमानी की, तो अल्लाह पाक ने आदम को (सज़ा के तौर पर) जन्नत से निकाल दिया था, और आपने बताया था कि अहद ए अलस्त में इंसान ने ख़ुद दुनियावी ज़िन्दगी की परीक्षा में दुनिया में आने के लिए सहमति जताई थी ... तो पूछना यह था कि अगर आदम को अल्लाह ने निकाला और इंसान ने खुद से इस दुनिया में टेस्ट में आने के लिए सहमति जताई तो दोनों बातों में फर्क क्यों महसूस हो रहा है ?
... हमें समझने में कहा गलती हो रही है ?"
.
.
जवाब: ..... व अलैकुम अस्सलाम भाई,
सही बात यही है कि अहद ए अलस्त में इंसान ने खुद दुनिया में आने की हामी भरी थी, और अल्लाह ने हज़रत आदम को किसी जुर्म की सज़ा में यहां नही भेजा है

.... गलती असल में रिवायती बातों को ही असल बात समझ लेने से हो रही है
.... ये एक आम ख़याल है कि अल्लाह ने आदम अलैहिस्सलाम और बीवी हव्वा को शुरू में आसमान में बनी जन्नत में रखा था और बाद में शैतान के बहकाने के बाद उन्हें ज़मीन में उतारा... लेकिन ये आम ख़याल शायद बाइबल में पहले से यही बात मौजूद होने की वजह से है और बाइबल में ईडन गार्डन में ख़ुदा का आना जाना बताया गया है जिससे उसके आसमानी जन्नत होने का ख्याल पुख़्ता होता है...,
..... लेकिन ये खयाल कि हज़रत आदम आसमान पर रह रहे थे, ये क़ुरआन के हिसाब से सही नहीं साबित होता.... याद कीजिये सूरह बक़रह की आयत कि अल्लाह ने आदम अलैहिस्सलाम की तख़लीक़ ही दुनिया मे रहने के लिए की थी "और याद करो जब तुम्हारे रब ने फरिश्तों से कहा कि मैं धरती में (मनुष्य को) खलीफ़ा बनाने वाला हूँ।" (2:30)
तो ये फ़रमाने, और आदम अलैहिस्सलाम की तख़लीक़ करने के बाद उनको आसमानी जन्नत में ही रखने कोई वजह नही रहती, बल्कि यही बात सही महसूस होती है कि आदम और हव्वा को अल्लाह ने पैदा करके दुनिया में ही भेज दिया था, फिर ये भी याद होना चाहिए कि अल्लाह ने अपने दरबार और आसमानी दुनिया से इब्लीस को निष्कासित कर दिया था (15:33-34) और उसके बाद शैतान आसमान ए दुनिया के ऊपर नहीं फटक सकते ( 15:16-18)  हक़ीक़तन अल्लाह की बनाई जन्नत के आसपास भी शैतान का गुज़र नही हो सकता .... जबकि क़ुरआन में लिखा है कि आदम के पास शैतान उन्हें बहकाने जा पहुँचा था, ऐसा तभी हो सकता है जबकि आदम आसमान में न रह रहे हों बल्कि ज़मीन पर रह रहे हों...
फिर क़ुरआन की आयतों में है कि अल्लाह ने एक दरख़्त से मना करके हज़रत आदम की आजमाइश की थी, और हम सब जानते हैं कि आज़माइश की जगह आसमानी जन्नत नही बल्कि ये दुनिया आज़माइश की जगह है
.
.
.... दरअसल जन्नत का लफ़ज़ी माना बाग़ है अल्लाह ने हज़रत आदम को दुनिया के एक बाग में रखा था जहां से अल्लाह की नाफरमानी करने के बाद उन्हें अल्लाह ने निकाल दिया क़ुरआन में जो लफ्ज़ "एहबितू" आदम को बाग़ से निकालने के लिए आया है उसके मानी उतरने के भी होते हैं, निकलने के भी और जाने के भी, जैसे हज़रत मूसा अपनी कौम को किसी शहर में जाने के लिये कहते हैं तो यही लफ्ज़ "एहबितू" इस्तेमाल करते हैं (अल-बक़रह, आयत-61), जिससे ज़ाहिर होता है कि ये लफ्ज़ ज़मीन से ज़मीन पर ही एक जगह से दूसरी जगह लिये भी इस्तेमाल किया जाता है
.
हम क़ुरआन की आयतों से ये भी जानते हैं कि आसमान की जन्नत में हमेशा की ज़िंदगी होगी जबकि आदम और हव्वा जहां थे वहां उनकी हमेशा की ज़िंदगी नही थी और वो शैतान के इसी बहकावे में आ गए थे कि उस शजर का फल खाने से उन्हें हमेशा की ज़िंदगी मिल जाएगी (देखिये सूरह ता-हा की 120वीं आयत) .... तो इस जन्नत यानी बाग़ में हमेशा की ज़िंदगी न होने से भी ज़ाहिर होता है कि ये बाग़ दुनिया में ही किसी जगह अल्लाह ने बनाया था
.
..... और सूरह इब्राहीम की 48वीं आयत यानी " जिस दिन यह धरती दूसरी धरती से बदल दी जाएगी और आकाश भी" इस आयत की बुनियाद पर ये माना जाता है कि अभी अल्लाह ने जन्नत और जहन्नुम को वजूद में नही लाया है, और अल्लाह पहले क़यामत में इस तमाम क़ायनात को ख़त्म कर डालेगा और फिर एक नई क़ायनात पैदा करेगा जिसमें वो जन्नत और जहन्नुम की तख़लीक़ करेगा... तो ज़ाहिर है जब अभी क़यामत से पहले वो जन्नत और जहन्नुम बने ही नहीं हैं तो हज़रत आदम और हव्वा के वहाँ रहने का सवाल ही पैदा नही हो सकता 
(लेकिन अभी जन्नत-जहन्नुम वजूद में नहीं हैं, .अगर आप इस पॉइंट से मुत्तफ़िक नही भी हैं तो भी इस लेख की बाकी दलीलें, ये साबित करने के लिए काफ़ी हैं कि ममनुआ पेड़ वाला वाक्या, हजरत आदम के साथ इसी ज़मीन पर हुआ था)

... अल्लाह ने हज़रत आदम को किसी जुर्म की सज़ा में यहां नही भेजा, ज़ाहिर ये होता है कि हज़रत आदम और बीवी हव्वा इसी दुनिया में किसी खूबसूरत जगह पर रह रहे थे जब ये शैतान के बहकाने वाला वाकया हुआ, और अल्लाह ने उन्हें बस उस बाग़ से निकाला था

वल्लाहु आलम !!

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

काबा में शिव जी के कैद होने का मिथ

औरत और पर्दा